Ramashtak Stotra Ramashtakam Stotram : रामाष्टक स्तोत्र

Ramashtak Stotra Ramashtakam Stotram : रामाष्टक स्तोत्र


Ramashtak Stotra

रामाष्टक स्तोत्र 

Ramashtakam Stotram 


        यह स्तोत्र महर्षि वेदव्यास जी द्वारा रचित है. प्रभु श्री राम का गुणगान एवम उनकी भक्ति के लाभ की गाथा इस स्तोत्र के माध्यम से महर्षि वेदव्यास जी ने बखान की है.   
        आइये इस रामाष्टक स्तोत्र (Ramashtak Stotra / Ramashtakam Stotram) के माध्यम से प्रभु श्री राम  (Prabhu Shri Ram) की चरण वंदना करे. 

श्री गणेशाय नमः 

भजे विशेषसुन्दरं समस्तपापखण्डनम्। 
स्वभक्तचित्तरञ्जनं सदैव राममद्वयम् ॥ १ ॥

जटाकलापशोभितं समस्तपापनाशकम्।
स्वभक्तभीतिभंजनं भजे ह राममद्वयम् ॥ २ ॥

निजस्वरूपबोधकं कृपाकरं भवापहम्।
समं शिवं निरंजनं भजे ह राममद्वयम् ॥ ३ ॥

सदाप्रञ्चकल्पितं ह्यनामरूपवास्तवम्।
निराकृतिं निरामयं भजे ह राममद्वयम् ॥ ४ ॥

निष्प्रपञ्चनिर्विकल्पनिर्मलं निरामयम्।
चिदेकरूपसंततं भजे ह राममद्वयम् ॥ ५ ॥

भवाब्धिपोतरूपकं ह्यशेषदेहकल्पितम्।
गुणाकरं कृपाकरं भजे ह राममद्वयम् ॥ ६ ॥

महावाक्यबोधकैर्विराजमनवाक्पदैः।
परब्रह्म व्यापकं भजे ह राममद्वयम् ॥ ७ ॥

शिवप्रदं सुखप्रदं भवच्छिदं भ्रमापहम्।
विराजमानदैशिकं भजे ह राममद्वयम् ॥ ८ ॥

रामाष्टकं पठति यः सुकरं सुपुण्यं 
व्यासेन भाषितमिदं श्रृणुते मनुष्यः।
विद्यां श्रियं विपुलसौख्यमनन्तकीर्ति 
सम्प्राप्य देहविलये लभते च मोक्षम् ॥ ९ ॥

॥ इति श्रीव्यासविरचितं रामाष्टकं संपूर्णम् ॥

।।इति संपूर्णंम्।। 
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